चंद्र माँ

तुम चाँद सी सरकती जाती हो
हौले हौले कि मुझे दूरी महसूस ना हो
मैं पृथ्वी सा अपनी धुन में
बल खाता, घूमता रहता हूँ
तुम चाँद सी सिकुड़ती जाती हो
आगामी पर सब न्योछावर कर
मैं पृथ्वी सा अपनी धुन में
ऊर्जा पाकर फूला नहीं समाता
तुम चाँद सी तकती रहती हो
हर पल मुझे आँखों में रखती हो
मैं पृथ्वी सा अपनी धुन में
सारा ब्रम्हाण्ड देखा करता हूँ
बल खाता, घूमता, फूलता, देखता
तारों में उलझा था इतने दिन
अब तुम पर नज़र आ टिकी है
अब समझ पा रहा हूँ तुम्हें
पर तुम इतनी दूर हो अब
चाँद जितना दूर है!
मैं भी चाँद बनकर एक पृथ्वी रचूँगा
और तुम्हारी तरह
उसे फलते देख
विलीन हो जाऊँगा शून्य में
इस तरह तुम्हारा ऋण मैं चुकाऊँगा
माँ

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