ভাটি গাঙ

পণ্যের জালে, সরঞ্জামের জোরে
আসবে যাবে তিথি
শ্বাসের তালে সকল নিশি ভোরে
থাকবে তবু স্মৃতি

“नौ बरस लम्बे थे ना?”

जो होते लम्बे, हमसे आगे निकल जाते
तन्हाई में उफनते जज़्बात निगल जाते
महज आंकड़े हैं ये उम्र के हिसाब के
करें क्या मोल ये सदियों के ख्वाब के
तय करना है अभी पूरी कायनात का सफर
प्यार से लम्बी कभी ना होगी वक़्त की उमर

 

आती रहें यूँ बहारें

भटकती फिरती हैं दुआएं, इनका मक़ाम नहीं होता
क्या बताऊँ तुझे कि परछाई का कोई नाम नहीं होता

जश्न आज भी मनाता हूँ, मन्नत मांगता हूँ अब भी
अथाह चाह का ये खज़ाना कभी तमाम नहीं होता